नंगी आँखों से देखने दो
नज़ारा कुछ और दिखता है
आसमान कुछ और नीला
पानी कुछ और साफ़
तारे कुछ और पास
समां कुछ और रंगीला
दिखता है
इंसान कुछ और इंसान
हैवान कुछ और हैवान
दिखता है
मासूमियत की झलक
पीड़ा की खनक
आँखों पे पानी
अट्टहास की घूंज
के एहसास का " एहसास" होता है
आखों की परत पर
परदे हज़ार हैं
विचारों के, शब्दों के, रीति-रिवाजों के
की मैं अपनी नज़र भूल गयी
जात-पात, ओहदे की
चकाचोंध से ये आखें हुयी अंधी
कुछ दिल की गाँठ खोलकर
आवाज़ को और बुलंद करके
विचारों में नयापन की तलाश है
नंगी आँखों से देखने दो
नज़ारा कुछ और दिखता है!
now this was good
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